🇲🇰Inspiring Stories - Motivational Stories- As Much Attachment More The Sadness(जितना मोह उतना दुःख)🇲🇰


एक दादाजी अपने घर के बाहर बैठकर अखबार पढ़ रहे थे । उम्र अधिक होने से अधिक चलते-फिरते, उठते-बैठते नहीं बनता था । एक सामने वाला मकान भी उनका था, जिसको बेचना था और उसको बेचने की बात भी कई दिनों से चल रही थी ।

🌟अचानक दादाजी क्या देखते हैं कि सामने वाले घर में आग लग गई है । घर में आग देखते ही अखबार रखकर जोर-जोर से चिल्लाने लगे, "अरे आग को बुझाओ, यह क्या हो गया ? पूरा घर जल जायेगा, मैं तो बर्बाद हो जाऊँगा ।" इस प्रकार दुःखी होने लगे । इतने में एक व्यक्ति वहाँ आया और बोला, "दादाजी ! क्यों घबड़ा रहे हो ? यह मकान तो आपके बेटे ने बेच दिया है, आपको रुपये नहीं मिले ? उसकी तो रजिस्ट्री भी हो गई ।" इतना सुनकर वे निश्चिन्त हो गये और पूर्व की तरह शांत भाव से अखबार पढ़ने लगे । अभी सामने वाला मकान जल रहा है, पूरा बुझा नहीं है ।

🌟इतने में ही दूसरा व्यक्ति आया और दादाजी से बोला, "सामने मकान जल रहा है और आप अखबार पढ़ रहे हो ?" तब दादाजी बोले, "अभी एक व्यक्ति ने बताया कि, "वह तो बेच दिया है, अब किस बात की चिन्ता ?" तब वह दूसरा व्यक्ति बोला, "अरे दादाजी ! मैं तो गवाही के लिए गया था, किन्तु हड़ताल होने के कारण कल रजिस्ट्री नहीं हो पाई थी ।" और इतना सुनते ही वे फिर चिल्लाने लगे और दुःखी होने लगे । पुनः इसी समय उनका बेटा दौड़ता हुआ आया और बोला, "दादाजी ! चिन्ता करने की कोई बात नहीं है, मैं कल दूसरी जगह जाकर रजिस्ट्री करा आया था, यह पैसे सम्हालो । अब तो दादाजी पूर्णतया निश्चिन्त होकर अखबार पढ़ने लगे ।

🍂एक छोटा सा दृष्टांत, बहुत बड़े सिद्धांत को सरलता से समझा रहा है । पर द्रव्य, परद्रव्य में है । मकान, मकान में है, जड़ है, वह मेरा कैसे हो सकता है ? क्योंकि मैं तो ज्ञान-दर्शनमय चैतन्य आत्मा हूँ ।

🍂वस्तु को, मकानादि को अपना मानने का दुःख है । वस्तु के प्रति जितना राग है, उतना दुःख है । सचमुच तो मिथ्यात्व का महादुःख है ।

🍂दादाजी को जब उस मकान में मोह था तो उनका नुकसान हो रहा था और जब वही मकान बिक गया तो उसी परिस्थिति में दुःख नहीं हो रहा था । वही मकान, वही जलने की स्थिति, किन्तु मानने में दुःख हो रहा था ।

🍂इसी प्रकार हमें सदा सुखी होना है तो सबसे पहले हमने वस्तुओं में जो मन लगा रखा हैं उसको छोड़े, खुद की अन्तरआत्मा को पहचाने। बाहरी वस्तुओं में कुछ नहीं रखा है, क्योंकि वे न तो सुख-दुःख रूप हैं और न ही सुख-दुःख के कारण हैं ।

                                                                 🟢⚜️ओम शान्ति ⚜️🟢

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