🇲🇰Motivational and Inspirational Stories in Hindi - Easy Guidelines - Facts of Life - Benevolence(परोपकार)🇲🇰


राजाराम सिंह बहुत ही गुणवान था, उसकी प्रजा की जुबान पर उसका नाम था । पड़ोसी राजा श्याम सिंह भी नाम, मान चाहता था पर उसमें ऐसे गुण न थे । ईर्ष्या वश उसने राजा राम सिंह पर चढ़ाई कर दी । दयालु राजा ने प्रजा को हिंसा की आग में झोंकने के बजाय, रात को चुपचाप महल छोड़कर जंगल की एक गुफा में छुप गया और श्यामसिंह ने राजधानी पर अधिकार कर लिया । गद्दी पर बैठ कर उसमें राजाराम सिंह को जिंदा पकड़ कर लाने वाले के लिए एक लाख का इनाम घोषित कर दिया । 

दो गरीब लकड़हारे के आपसी वार्तालाप के द्वारा जब दयालु राजा ने घोषणा की बात सुनी तो उनके आगे अपने को समर्पित कर दिया और कहा, मुझे दरबार में ले चलो, तुम्हारी गरीबी दूर हो जाएगी । वह ना नुकुर करने लगे तो चार राहगीरों ने सारा मामला समझ लिया । इनाम पाने के लोभ में वे राजा को दरबार में ले आए और राजा श्यामसिंह के सामने मैंने पकड़ा, मैंने पकड़ा चिल्लाने लगे । परंतु लकड़हारो ने आदि से अंत तक की सारी कहानी राजा को सच-सच सुना दी । 

श्यामसिंह ने चारों राहगीरों को सजा देकर दरबार से बाहर निकाल दिया और गद्दी से उतरकर राजा रामसिंह को छाती से लगा लिया फिर बोले जैसा सुना था वैसे ही आप निकले । परोपकार के लिए अपनी जान भी खतरे में डाल दी मैं सात जन्म भी आपकी चरणरज की समानता नहीं कर सकता । अपना राज्य कीजिए और महल लीजिए और खजाना संभालिए । आप नामवरी के योग्य हैं ।

जिस प्रकार डॉक्टर रोग को मारता है, रोगी को नहीं, उसी प्रकार महान व्यक्ति शत्रुता को मारता है और शत्रु को मित्र बना लेता है । किसी भी उपाय से शत्रुता को मार डालो । बस शत्रु को मानो जीत लिया । परमपिता परमात्मा ने हम बच्चों को भी दूसरों की कमी कमजोरियों को माफ करने की कला सिखाई हैं । वास्तव में क्षमा ही सर्वश्रेष्ठ शस्त्र है । क्षमा के द्वारा ही दूसरों को उसकी गलती का सच्चा अहसास हो सकता है और वह सदा के लिए अपने को अच्छाई की ओर मोड़ लेता है । क्षमा, स्थाई परिवर्तन की अचूक विधि है ।

Om Shanti

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