🇲🇰Inspiring stories - Motivational stories - Facts of Life - Value of Giving(दान का महत्व)🇲🇰


एक नगर में एक भिखारी रहता था अपनी पत्नी के साथ , वह भिखारी सुबह - सुबह भीख मांगने निकला । चलते समय उसने अपनी झोली में जौ के मुट्ठी भर दाने डाल दिए , इस अंधविश्वास के कारण कि भिक्षाटन के लिए निकलते समय भिखारी अपनी झोली खाली नहीं रखते । थैली देखकर दूसरों को भी लगता है कि इसे पहले से ही किसी ने कुछ दे रखा है ।

पूर्णिमा का दिन था । भिखारी सोच रहा था कि आज अगर ईश्वर की कृपा होगी तो मेरी यह झोली शाम से पहले ही भर जाएगी । अचानक सामने से राजपथ पर उसी देश के राजा की सवारी आती हुई दिखाई दी ।

भिखारी खुश हो गया । उसने सोचा कि राजा के दर्शन और उनसे मिलने वाले दान से आज तो उसकी सारी दरिद्रता दूर हो जाएंगी और उसका जीवन संवर जाएगा ।

जैसे - जैसे राजा की सवारी निकट आती गई , भिखारी की कल्पना और उत्तेजना भी बढ़ती गई । जैसे ही राजा का रथ भिखारी के निकट आया , राजा ने अपना रथ रूकवाया और उतर कर उसके निकट पहुंचे ।

भिखारी की तो मानो सांसें ही रूकने लगीं , लेकिन राजा ने उसे कुछ देने के बदले उल्टे अपनी बहुमूल्य चादर उसके सामने फैला दी और उससे भीख की याचना करने लगा ।

भिखारी को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें । अभी वह सोच ही रहा था कि राजा ने पुनः याचना की । भिखारी ने अपनी झोली में हाथ डाला मगर हमेशा दूसरों से लेने वाला मन देने को राजी नहीं हो रहा था ।

जैसे तैसे करके उसने दो दाने जौ के निकाले और राजा की चादर में डाल दिए । उस दिन हालांकि भिखारी को अधिक भीख मिली , लेकिन अपनी झोली में से दो दाने जौ के देने का मलाल उसे सारा दिन रहा ।

शाम को जब उसने अपनी झोली पलटी तो उसके आश्चर्य की सीमा न रही । जो जौ वह अपने साथ झोली में ले गया था , उसके दो दाने सोने के हो गए थे ।

अब उसे समझ में आया कि यह दान की महिमा के कारण ही हुआ । वह पछताया कि - काश ! उस समय उसने राजा को और अधिक जौ दिए होते लेकिन दे नहीं सका , क्योंकि उसकी देने की आदत जो नहीं थी ।

इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि , देने से कोई चीज कभी घटती नहीं । लेने वाले से देने वाला बड़ा होता है । अंधेरे में छाया बुढ़ापे में काया और अन्त समय में माया किसी का साथ नहीं देती ।

Om Shanti

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