🇲🇰Inspiring stories - Motivational stories - easy guidelines -Vision of Divine(परमात्मा के दर्शन)🇲🇰


एक सूफी फकीर एक रात सोया, सोते समय उस फकीर के मन में एक प्रार्थना थी, परमात्मा के दर्शन की इच्छा थी।
रात उसने एक सपना देखा, सपने में देखा कि वह परमात्मा के नगर में पहुंच गया है। बहुत भीड़-भाड़ है रास्तों पर, कोई बहुत बड़ा उत्सव मनाया जा रहा है। उसने पूछा किसी से, तो ज्ञात हुआ परमात्मा का जन्म-दिन है।

एक बहुत बड़े रथ पर एक बहुत प्रतिभाशाली व्यक्ति सवार है, पूछा यही परमात्मा हैं, उधर से ज्ञात हुआ नहीं, ये तो राम हैं और उनके पीछे राम के हजारों-लाखों भक्त हैं। फिर और पीछे घोड़े पर सवार कोई बहुत महिमाशाली व्यक्ति है, पूछा, ये परमात्मा हैं, ज्ञात हुआ, ये तो मोहम्मद हैं और उनके पीछे उनके भक्त हैं।और ऐसे वह शोभायात्रा लंबी होती गई। क्राइस्ट निकले, और महावीर, और बुद्ध, और धीरे-धीरे शोभायात्रा समाप्त हो गई।

सबसे अंत में एक बहुत बूढ़ा आदमी जो सफ़ेद वस्त्र धारण किये हुए था पर सिर से बहुत तेज़ प्रकाश निकल रहा था जिसके साथ कोई भी नहीं था। उसे देख कर, उस फकीर को देख कर हंसी आने लगी, किसी से उसने पूछा कि यह कौन पागल है जो अकेला है, और जिसके साथ कोई भी नहीं है? तो ज्ञात हुआ वह परमात्मा है। परमात्मा जो निराकार ज्योति बिंदु स्वरुप हैं उसने एक बूढ़े तन का आधार लिया हैं |

उसे बहुत हैरानी हुई। और उसने पूछा कि राम के साथ बहुत लोग हैं, क्राइस्ट के साथ बहुत लोग हैं, बुद्ध और महावीर के साथ बहुत लोग हैं, मोहम्मद के साथ बहुत लोग हैं, लेकिन परमात्मा के साथ कोई क्यों नहीं? ज्ञात हुआ, सारे लोग मोहम्मद, महावीर और राम में बंट गए हैं, परमात्मा के लिए कोई बचा नहीं।

उसकी घबड़ाहट में नींद खुल गई। उसने कभी सोचा भी नहीं था, वह बहुत घबड़ाया। लेकिन यह स्वप्न मैं इसलिए आपसे कह रही हूं कि ऐसी ही स्थिति सारी दुनिया में घट रही है। आज हमने ही इस संसार को हिन्दू, मुस्लिम, सिक़ह, ईसाई, में बाट दिया हैं और परमात्मा को ढूंढ रहे हैं मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, गिरजाघरों में पर सच्ची मन की शांति किसीको नहीं मिल रही | 

वो परमात्मा जो निराकार हैं जो हम सब का परमपिता हैं, जिसके लिए हम खुद कहते हैं- भगवान, अल्लाह, एकोमकार, गॉड इस लाइट, सबका मालिक एक जिनका रूप भी एक ही हैं निराकार ज्योति बिंदुरूप हैं, फिर भी हम जाति, धर्म के नाम लड़ते हैं की मेरा धर्म महान, मेरा धर्म महान | 

कभी हमने अपने ही बोले शब्दों पर ध्यान नहीं दिया जब खुद कहते हिन्दू, मुस्लिम, सिक़ह, ईसाई आपस में हैं भाई-भाई, फिर भी अपने बच्चो को यही शिक्षा दे रहे हैं | ऐसी धार्मिक शिक्षा धर्म तो नहीं लाएगी मनुष्य को और अधिक अधार्मिक बनाती है। इस तरह की शिक्षा तो कई वर्षों से मनुष्य को दी जाती रही है। लेकिन उसने कोई बेहतर मनुष्य पैदा नहीं किया। उससे कोई अच्छा समाज पैदा नहीं हुआ।

विपरीत हिंदू, मुस्लिम, सिक़ह, ईसाई के नामों पर जितना अधर्म, जितनी हिंसा, जितना रक्तपात हुआ है उतना किसी और बात से नहीं हुआ।

Om Shanti

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