Inspirational Stories - कर्म का फल (Fruit of Karma Story in Hindi)


एक गांव में जमींदार और उसके एक मजदूर की साथ ही मौत हुई। दोनों यमलोक पहुंचे।

धर्मराज ने जमींदार से कहा: आज से तुम मजदूर की सेवा करोगे।

मजदूर से कहा: अब तुम कोई काम नहीं करोगे, आराम से यहां रहोगे।
जमींदार परेशान हो गया। पृथ्वी पर तो मजदूर जमींदार की सेवा करता था, पर अब उल्टा होने वाला था।

जमींदार ने कहा: भगवन, आप ने मुझे यह सजा क्यों दी?
मैं तो भगवान का परम भक्त हूं। प्रतिदिन मंदिर जाता था। देसी घी से भगवान की आरती करता था और बहुमूल्य चीजें दान करता था। धर्म के अन्य आयोजन भी मैं करता ही रहता था।

धर्मराज ने मजदूर से पूछा: तुम क्या करते थे पृथ्वी पर?

मजदूर ने कहा: भगवन, मैं गरीब मजदूर था। दिन भर जमींदार के खेत में मेहनत मजदूरी करता था। मजदूरी में उनके यहां से जितना मिलता था, उसी में परिवार के साथ गुजारा करता था। मोह माया से दूर जब समय मिलता था तब भगवान को याद कर लेता था। भगवान से कभी कुछ मांगा नहीं।

गरीबी के कारण प्रतिदिन मंदिर में आरती तो नहीं कर पाता था, लेकिन जब घर में तेल होता तब मंदिर में आरती करता था और आरती के बाद दीपक को अंधेरी गली में रख देता था ताकि अंधेरे में आने-जाने वाले लोगों को प्रकाश मिले।

धर्मराज ने जमींदार से कहा: आपने सुन ली न मजदूर की बात?

भगवान धन-दौलत और अहंकार से खुश नहीं होते। भगवान मेहनत और ईमानदारी से कमाने वाले व्यक्ति से प्रसन्न रहते हैं। यह मजदूर तुम्हारे खेतों में काम करके खुश रहता था और सच्चे मन से भगवान की आराधना करता था। जबकि तुम आराधना ज्यादा धन पाने के लिए करते थे। तुम मजदूरों से ज्यादा काम लेकर कम मजदूरी देते थे। तुम्हारे इन्हीं कामों के कारण तुम्हें मजदूर का नौकर बनाया गया है ताकि तुम भी एक नौकर के दुख-दर्द को समझ सको।

Inspirational Stories - कर्म का फल (Fruit of karma)


In a village, a landlord and one of his laborers died simultaneously. Both reached Yamlok.

Dharmaraja said to the zamindar: From today you will serve the laborer.

He told the laborer: Now you will not do any work, you will live here comfortably.
The landlord got upset. The worker used to serve the zamindar on earth, but now it was going to reverse.

The zamindar said: Lord, why did you give me this punishment?
I am a great devotee of God. Used to visit the temple every day. The Lord used to offer Lord Aarti with desi ghee and donate valuable things. I also used to do other religious programs.

Dharmaraja asked the laborer: What on earth did you do?

The laborer said: God, I was a poor laborer. Throughout the day, the laborer used to work hard in the field. He used to live with the family in the wages he got from here. Moh used to remember God when he got time away from Maya. Never asked God for anything.

Due to poverty, he was not able to perform Aarti in the temple every day, but when there was oil in the house, he used to perform Aarti in the temple and after the Aarti, put the lamp in a dark alley so that people going in the dark would get light.

Dharmaraja said to the landlord: Did you not listen to the matter of the laborer?

God is not happy with wealth and ego. God is pleased with a person who earns hard work and honesty. This laborer was happy working in your fields and worshiped God with a sincere heart. Whereas you used to worship to get more money. You used to pay less wages than laborers. Because of your work, you have been made a servant of a laborer so that you too can understand the sorrow and pain of a servant.

Om Shanti

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