Motivational Stories - ईमानदारी (Honesty Hindi Story) | Inspirational Stories - Easy Guidelines


एक राजा ने अपने उत्तराधिकारी के चुनाव के लिए राज्य के नौजवानों को एक-एक बीज दिया और कहां इसे गमले में लगाकर सींचना । और 1 वर्ष बाद मेरे पास लेकर आना । जिसका पौधा सबसे अच्छा होगा उसे राजा बनाया जाएगा । 

बीज लेकर सब खुशी-खुशी घर लौटे । पांच छह दिन गुजर जाने पर भी जब बीज अंकुरित नहीं हुआ तो सबने उसी प्रकार का बीज नर्सरी से खरीद कर अपने अपने गमले में लगा दी । और जी जान लगाकर खाद पानी से उसकी संभाल करने लगे । केवल बैजू नाम का नौजवान ही ऐसा था जो अपने खाली गमले को देख चिंतित तो था पर उसने बाजार से दूसरा बीज खरीदने का दुस्साहस नहीं किया ।

 निश्चित समय पर सभी ने बड़े-बड़े पौधों वाले गमले राजा के सम्मुख पेश किए, केवल बैजू ही एक कोने में डरा सहमा खड़ा था अपने खाली गमले के साथ । राजा ने उसे अपने पास बुलाया और घोषणा की कि बैजू ही मेरा उत्तराधिकारी है । जब जनता ने उसके खाली गमले को प्रश्नवाचक नजरों से देखा तो राजा ने भेद खोला कि मैंने उबले हुए बीज सभी को दिए थे । बैजू पूरा साल उसी उबले बीज को ईमानदारी से सींचता रहा जबकि शेष सभी ने राजा पाने के लोभ में बीज बदल दिए । ये बड़े-बड़े पौधे इनकी बेईमानी की कहानी कह रहे हैं ।

बैजूं ही एकमात्र ऐसा ईमानदार लड़का है जिसने बीज नहीं बदला और उसी को पूरे वर्ष ईमानदारी से अंकुरित करने का प्रयास करता रहा । बीज को अंकुरित होना ही नहीं था लेकिन बैजूं हिम्मत व ईमानदारी से अपना खाली गमला ही मेरे पास लेकर आया । राजा ने घोषणा की कि हर राज्य की जनता यह उम्मीद करती है कि उसका राजा हिम्मतवाला व ईमानदार हो और बैजूं ने अपने इसी हिम्मत व ईमानदारी का परिचय दिया है । इसीलिए इस राज्य का अगला राजा बैजूं ही होगा ।

जब हम बुद्धि रूपी जमीन में ईमानदारी का बीजारोपण कर उसे सीचेंगे तो विश्वास रूपी मीठे फल निकलेगे । अच्छाई का बीज  सींचने पर सच्चे मित्रों की प्राप्ति होगी तथा नम्रता का बीज डालने पर महानता रूपी फल निकलेगा । यदि बेईमानी का बीज डाला तो अविश्वास के कांटे निकलेगेे । स्वार्थ का बीज डाला तो अकेलेपन का अनुभव होगा । पाप का बीज डाला तो अपराध बोध की झाड़ियां उगेगी । लालच करेंगे तो स्वयं का ही नुकसान होगा ।

 इसीलिए क्या बीज लगाना है इसकी सावधानी रखनी है । आज लगाए गए बीज के आधार पर भविष्य की फसल मिलेगी । आज श्रेष्ठ कर्मों के बीज डालेंगे तो भविष्य में अच्छे मीठे फल खाएंगे और बुरे कर्मों के बीज डालने पर भविष्य में उनकी कीमत भी हमें ही चुकानी होगी

Inspirational Stories-  ईमानदारी (Honesty)



Inspirational Stories-  Honesty

A king gave each seed to the youth of the state to elect his successor and where to plant it in a pot. And bring it to me after 1 year. The one whose plant is the best will be made king.

Everyone returned home happily with the seeds. Even after five to six days had passed, when the seeds did not germinate, they bought the same type of seed from the nursery and put it in their pot. And he started taking care of the manure with water. It was only the youngster named Baiju who was worried to see his empty pot, but he did not dare to buy another seed from the market.

 At a certain time, all of them presented the pots with big plants to the king, only Baiju was standing in a corner scared with his empty pot. The king summons him to him and declares that Baiju is my successor. When the public saw her empty pot with questioning eyes, the king revealed the secret that I had given boiled seeds to everyone. Baiju irrigated the same boiled seed faithfully throughout the year, while the rest changed the seeds in the greed to get the king. These big plants are telling the story of their dishonesty.

Baiju is the only honest boy who has not changed the seed and has been trying to sprout it faithfully throughout the year. The seed did not have to sprout, but Baiju brought it to me with courage and honesty. The king announced that the people of every state expect that his king should be courageous and honest and Baijun has shown his courage and honesty. That is why Baiju will be the next king of this state.

When we plant seeds of honesty in the land of wisdom and seize it, then sweet fruits of faith will emerge. On irrigating the seeds of good, true friends will be obtained and pouring seeds of humility will result in greatness. If the seed of dishonesty is poured, then there will be thorns of mistrust. If you put a seed of selfishness, you will experience loneliness. If the seed of sin is planted then the bushes of guilt will grow. If you lure, then there will be loss of self.

 That is why care is to be taken about planting seeds. Future crops will be found on the basis of seeds planted today. Today, if we plant the seeds of good deeds, then we will eat good sweet fruits in the future and if we put the seeds of bad deeds, we will have to pay their price in future.


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Om Shanti

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