Inspirational Stories - इन्द्र और तोता (Indra and parrot) - Motivational Speaker By BK Shradha


<h2>Inspirational Stories - इन्द्र और तोता</h2>

देवराज इन्द्र और धर्मात्मा तोते की यह कथा महाभारत से है।कहानी कहती है,अगर किसी के साथ ने अच्छा वक्त दिखाया है तो बुरे वक्त में उसका साथ छोड़ देना ठीक नहीं। 

एक शिकारी ने शिकार पर तीर चलाया। तीर पर सबसे खतरनाक जहर लगा हुआ था।पर निशाना चूक गया।तीर हिरण की जगह एक फले-फूले पेड़ में जा लगा।पेड़ में जहर फैला।वह सूखने लगा।उस पर रहने वाले सभी पक्षी एक-एक कर उसे छोड़ गए।पेड़ के कोटर में एक धर्मात्मा तोता बहुत बरसों से रहा करता था। तोता पेड़ छोड़ कर नहीं गया,बल्कि अब तो वह ज्यादातर समय पेड़ पर ही रहता।दाना-पानी न मिलने से तोता भी सूख कर काँटा हुआ जा रहा था।बात देवराज इन्द्र तक पहुँची। मरते वृक्ष के लिए अपने प्राण दे रहे तोते को देखने के लिए इन्द्र स्वयं वहाँ आए।

धर्मात्मा तोते ने उन्हें पहली नजर में ही पहचान लिया।इन्द्र ने कहा, देखो भाई इस पेड़ पर न पत्ते हैं, न फूल, न फल।अब इसके दोबारा हरे होने की कौन कहे, बचने की भी कोई उम्मीद नहीं है।जंगल में कई ऐसे पेड़ हैं, जिनके बड़े-बड़े कोटर पत्तों से ढके हैं।पेड़ फल-फूल से भी लदे हैं।वहाँ से सरोवर भी पास है।तुम इस पेड़ पर क्या कर रहे हो, वहाँ क्यों नहीं चले जाते ?तोते ने जवाब दिया, देवराज,मैं इसी पर जन्मा, इसी पर बढ़ा, इसके मीठे फल खाए।इसने मुझे दुश्मनों से कई बार बचाया। इसके साथ मैंने सुख भोगे हैं।आज इस पर बुरा वक्त आया तो मैं अपने सुख के लिए इसे त्याग दूँ।जिसके साथ सुख भोगे, दुख भी उसके साथ भोगूँगा, मुझे इसमें आनन्द है।आप देवता होकर भी मुझे ऐसी बुरी सलाह क्यों दे रहे हैं ?' यह कह कर तोते ने तो जैसे इन्द्र की बोलती ही बन्द कर दी।तोते की दो-टूक सुन कर इन्द्र प्रसन्न हुए, बोल,मैं तुमसे प्रसन्न हूँ।कोई वर मांग लो।तोता बोला, मेरे इस प्यारे पेड़ को पहले की तरह ही हरा-भरा कर दीजिए।देवराज ने पेड़ को न सिर्फ अमृत से सींच दिया, बल्कि उस पर अमृत बरसाया भी।पेड़ में नई कोपलें फूटीं।वह पहले की तरह हरा हो गया, उसमें खूब फल भी लग गए।तोता उस पर बहुत दिनों तक रहा, मरने के बाद देवलोक को चला गया।

युधिष्ठिर को यह कथा सुना कर भीष्म बोले,अपने आश्रयदाता के दुख को जो अपना दुख समझता है,उसके कष्ट मिटाने स्वयं ईश्वर आते हैं।बुरे वक्त में व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाता है। जो उस समय उसका साथ देता है,उसके लिए वह अपने प्राणों की बाजी लगा देता है।किसी के सुख के साथी बनो न बनो,दुख के साथी जरूर बनो।यही धर्मनीति है और कूटनीति भी |

Inspirational Stories - इन्द्र और तोता (Indra and parrot)


Inspirational Stories - (Indra and parrot)

This story of Devraj Indra and the Dharmatha parrot is from the Mahabharata. Kahani says, if someone has shown a good time with someone, then it is not right to leave him in bad times.

A hunter shot an arrow at the hunt. The arrow had the most dangerous poison on it, but it missed the target. In place of the three deer, it went into a bloated tree. The poison spread in the tree. It started drying up. All the birds living on it left them one by one. A godly parrot used to live in a tree cover for many years. The parrot did not leave the tree, but now it would remain on the tree most of the time. Due to lack of water and water, the parrot was also being pricked and dried. The thing reached Devraj Indra. Indra himself came there to see the parrot giving his life for the dying tree.

The godly parrot recognized him at first sight. Indra said, Look brother, there are no leaves, no flowers, no fruit on this tree. Now who says it will be green again, there is no hope of survival. Many in the forest There are trees with big coverts covered with leaves. The trees are also laden with fruits. The lake is also nearby. Why are you doing this tree, why don't you go there? The parrot replied, Devraj, I was born on this, this But grew, ate its sweet fruit. It saved me many times from enemies. I have enjoyed happiness with it. If I have a bad time today, then I should abandon it for my happiness. With which I will enjoy happiness, I will enjoy it with it, I am happy in it. Why are you giving me such bad advice even after being a god Huh ?' Saying this, the parrot stopped as soon as Indra spoke. Indra was pleased to hear the tip of the tip, say, I am happy with you. Ask for a bridesmaid. Tota said, this lovely tree of mine like before. Make the tree green. Deoraj not only watered the tree with nectar, but also showered nectar on it. Sprouted new coplanes in the tree. It became green like before, it also bore a lot of fruit. Lasted, give it after death Went public.

On hearing this story to Yudhishthira, Bhishma said, God himself comes to erase the suffering of his refugee who considers his suffering. The person becomes emotionally weak during the time. For those who support him at that time, he puts his life at stake. Do not become a partner of happiness, be a companion of sorrow. That is righteousness and diplomacy.

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