Inspirational Stories - प्रेम के बोल (Lyrics of Love in Hindi Best Story)



Inspirational Stories - प्रेम के बोल 

एक गाँव में एक मजदुर रहा करता था जिसका नाम हरिराम था | उसके परिवार में कोई नहीं था | दिन भर अकेला मेहनत में लगा रहता था | दिल का बहुत ही दयालु और कर्मो का भी बहुत अच्छा था | मजदुर था इसलिए उसे उसका भोजन उसे मजदूरी के बाद ही मिलता था | आगे पीछे कोई ना था इसलिये वो इस आजीविका से संतुष्ट था |

एक बार उसे एक छोटा सा बछड़ा मिल गया | उसने ख़ुशी से उसे पाल लिया उसने सोचा आज तक वो अकेला था अब वो इस बछड़े को अपने बेटे के जैसे पालेगा | हरिराम का दिन उसके बछड़े से ही शुरू होता और उसी पर ख़त्म होता वो रात दिन उसकी सेवा करता और उसी से अपने मन की बात करता | कुछ समय बाद बछड़ा बैल बन गया | उसकी जो सेवा हरिराम ने की थी उससे वो बहुत ही सुंदर और बलशाली बन गया था |

गाँव के सभी लोग हरिराम के बैल की ही बाते किया करते थे | किसानों के गाँव में बैल की भरमार थी पर हरिराम का बैल उन सबसे अलग था | दूर-दूर से लोग उसे देखने आते थे |हर कोई हरिराम के बैल के बारे में बाते कर रहा था l
हरिराम भी अपने बैल से एक बेटे की तरह ही प्यार करता था भले खुद भूखा सो जाये लेकिन उसे हमेशा भर पेट खिलाता था एक दिन हरिराम के स्वप्न में शिव का नंदी बैल आया उसने उससे कहा कि हरिराम तुम एक निस्वार्थ सेवक हो तुमने खुद की तकलीफ को छोड़ कर अपने बैल की सेवा की हैं इसलिये मैं तुम्हारे बैल को बोलने की शक्ति दे रहा हूँ | इतना सुनते ही हरिराम जाग गया और अपने बैल के पास गया | उसने बैल को सहलाया और मुस्कुराया कि भला एक बैल बोल कैसे सकता हैं तभी अचानक आवाज आई बाबा आपने मेरा ध्यान एक पुत्र की तरह रखा हैं मैं आपका आभारी हूँ और आपके लिए कुछ करना चाहता हूँ यह सुनकर हरिराम घबरा गया उसने खुद को संभाला और तुरंत ही बैल को गले लगाया | उसी समय से वह अपने बैल को नंदी कहकर पुकारने लगा | दिन भर काम करके आता और नंदी से बाते करता |

गरीबी की मार बहुत थी नंदी को तो हरिराम भर पेट देता था लेकिन खुद भूखा सो जाता था यह बात नंदी को अच्छी नहीं लगी उसने हरिराम से कहा कि वो नगर के सेठ के पास जाये और शर्त रखे कि उसका बैल नंदी सो गाड़ी खीँच सकता हैं और शर्त के रूप में सेठ से हजार मुहरे ले लेना |  हरिराम ने कहा नंदी तू पागल हो गया हैं भला कोई बैल इतना भार वहन कर भी सकता हैं मैं अपने जीवन से खुश हूँ मुझे यह नहीं करना लेकिन नंदी के बार-बार आग्रह करने पर हरिराम को उसकी बात माननी पड़ी |

एक दिन डरते-डरते हरिराम सेठ दीनदयाल के घर पहुँचा | दीनदयाल ने उससे आने का कारण पूछा तब हरिराम ने शर्त के बारे में कहा | सेठ जोर जोर से हँसने लगा बोला हरिराम बैल के साथ रहकर क्या तुम्हारी मति भी बैल जैसी हो गई हैं अगर शर्त हार गये तो हजार मुहर के लिये तुम्हे अपनी झोपड़ी तक बैचनी पड़ेगी |यह सुनकर हरिराम और अधिक डर गया लेकिन मुँह से निकली बात पर मुकर भी नहीं सकता था|

शर्त का दिन तय किया गया और सेठ दीनदयाल ने पुरे गाँव में ढोल पिटवाकर इस प्रतियोगिता के बारे गाँव वालो को खबर दी और सभी को यह अद्भुत नजारा देखने बुलाया | सभी खबर सुनने के बाद हरिराम का मजाक उड़ाने लगे और कहने लगे कि यह शर्त तो हरिराम ही हारेगा | यह सब सुन सुनकर हरिराम को और अधिक डर लगने लगा और उससे नंदी से घृणा होने लगी वो उसे कौसने लगा बार बार उसे दोष देता और कहता कि कहाँ मैंने इस बैल को पाल लिया मेरी अच्छी भली कट रही थी इसके कारण सर की छत से भी जाऊँगा और लोगो की थू थू होगी वो अलग | अब हरिराम को नंदी बिलकुल भी रास नहीं आ रहा था |

वह दिन आ गया जिस दिन प्रतियोगिता होनी थी | सौ माल से भरी गाड़ियों के आगे नंदी को जोता गया और गाड़ी पर खुद हरिराम बैठा | सभी गाँव वाले यह नजारा देख हँस रहे थे और हरिराम को बुरा भला कह रहे थे | हरिराम ने नंदी से कहा देख तेरे कारण मुझे कितना सुनना पड़ रहा हैं मैंने तुझे बेटे जैसे पाला था और तूने मुझे सड़क पर लाने का काम किया | हरिराम के ऐसे घृणित शब्दों के कारण नंदी को गुस्सा आगया और उसने ठान ली कि वो एक कदम भी आगे नहीं बढ़ायेगा और इस तरह हरिराम शर्त हार गया सभी ने उसका मजाक उड़ाया और उसे अपनी झोपड़ी सेठ को देनी पड़ी |

अब हरिराम नंदी के साथ मंदिर के बाहर पड़ा हुआ था और नंदी के सामने रो रोकर उसे कोस रहा था उसकी बाते सुन नंदी को सहा नहीं गया और उसने कहा बाबा हरिराम यह सब तुम्हारे कारण हुआ | यह सुन हरिराम चौंक गया उसने गुस्से में पूछा कि क्या किया मैंने ? तुमने भांग खा रखी हैं क्या ? तब नंदी ने कहा कि तुम्हारे प्रेम के बोल के कारण ही भगवान ने मुझे बोलने की शक्ति दी | और मैंने तुम्हारे लिये यह सब करने की सोची लेकिन तुम उल्टा मुझे ही कोसने लगे और मुझे बुरा भला कहने लगे तब मैंने ठानी मैं तुम्हारे लिये कुछ नहीं करूँगा लेकिन अब मैं तुमसे फिर से कहता हूँ कि मैं सो गाड़ियाँ खींच सकता हूँ तुम जाकर फिर से शर्त लगाओ और इस बार अपनी झोपड़ी और एक हजार मुहरे की शर्त लगाना |

हरिराम वही करता हैं और फिर से शर्त के अनुसार सो गाड़ियाँ तैयार कर उस पर नंदी को जोता जाता हैं और फिर से उस पर हरिराम बैठता हैं और प्यार से सहलाकर उसे गाड़ियाँ खीचने कहता हैं और इस बार नंदी यह कर दिखाता हैं जिसे देख सब स्तब्ध रह जाते हैं और हरिराम शर्त जीत जाता हैं | सेठ दीनदयाल उसे उसकी झोपड़ी और हजार मुहरे देता हैं |

मित्रों, जीवन में प्रेम से ही किसी को जीता जा सकता हैं | कहते हैं प्रेम के सामने ईश्वर भी झुक जाते हैं इसलिये सभी को प्रेम के बोल ही बोलना चाहिये |

Om Shanti



Inspirational Stories - प्रेम के बोल (Lyrics of love)



Inspirational Stories - (Lyrics of love)

There used to be a Mazdoor in a village named Hariram. There was no one in his family. Used to work alone all day. The heart was very kind and also very good for actions. Because he was a Mazdoor, he used to get his food only after his wages. There was no back and forth, so he was satisfied with this livelihood.

Once he found a small calf. He happily raised him. He thought that he was alone till today, now he will raise this calf like his son. Hariram's day started from his calf and ended at that, he would serve him day and night and talk to him about his mind. After some time the calf became a bull. Hariram's service to him made him very beautiful and powerful.

All the people of the village used to talk about Hariram's bull. There was a lot of bull in the village of farmers, but Hariram's bull was different from them. People used to come to see him from far and wide. Everyone was talking about Hariram's bull.
Hariram also loved his bull like a son, though he himself would go to sleep hungry but always fed him a stomach. One day Shiva's Nandi bull came in Hariram's dream. He told him that Hariram you are a selfless servant. Except I have served my bull, therefore I am giving your bull the power to speak. Hearing this, Hariram woke up and went to his bull. He caressed the bull and smiled that how can a bull speak, then suddenly the voice came Baba you have taken care of me like a son, I am thankful to you and want to do something for you, Hariram got nervous hearing this and he took care of himself and immediately He hugged the bull. From that time he started calling his bull as Nandi. He would come to work all day and talk to Nandi.

There was a lot of poverty, Hariram used to give a full load to Nandi but he did not like to sleep hungry. He told Hariram that he should go to the Seth of the city and put a condition that his bull Nandi can pull the car And as a condition, take a thousand pieces from Seth. Hariram said, Nandi, you have gone mad, no bull can bear this much weight, I am happy with my life, I do not do this, but Hariram had to obey Nandi's repeated requests.

One day fearfully Hariram reached the house of Seth Deendayal. Deendayal asked her the reason for coming, then Hariram said about the condition. Seth started laughing loudly. Hariram, living with the bull, has become like your bull too. If you lose the bet, then you will have to go to your hut for a thousand seal. Hearing this, Hariram was more afraid but came out of the mouth. Could not even retract.

The day of the bet was fixed and Seth Deendayal beat the drums in the entire village and informed the villagers about this competition and invited everyone to see this amazing sight. After hearing all the news, he started making fun of Hariram and started saying that this condition will lose Hariram only. Hearing all this, Hariram started to get more scared and hated Nandi, he started to blame him again and again and said that where I raised this bull, I was cutting well, due to this, even from the roof of the head. I will go and the people will be separated. Now Hariram did not like Nandi at all.

The day has come when the competition was to be held. Nandi was plowed in front of trains loaded with hundred goods and Hariram himself sat on the carriage. All the villagers were laughing at this sight and calling Hariram bad. Hariram said to Nandi, see how much I have to listen to you because I brought you up like a son and you did the work of bringing me on the road. Due to such hateful words of Hariram, Nandi got angry and decided that he would not take even a step further and thus Hariram lost the bet, all made fun of him and he had to give his hut to Seth.

Now Hariram was lying outside the temple with Nandi and was cursing him crying in front of Nandi, listening to his talk, Nandi was not able to suffer and he said Baba Hariram all this happened because of you. Hearing this, Hariram was shocked and asked angrily what did I do? Have you eaten cannabis? Then Nandi said that it was because of the words of your love that God gave me the power to speak. And I thought of doing all this for you, but you started cursing me and started calling me bad then I decided I would not do anything for you but now I tell you again that I can pull the vehicles so you can go again Place a bet and this time bet your hut and a thousand pawn.

Hariram does the same and again prepares the cars according to the condition and plows Nandi on it and again Hariram sits on it and lovingly tells him to pull the carts and this time Nandi shows this by doing what everyone is shocked to see. Remains and Hariram wins the bet. Seth Deendayal gives him his hut and thousands of pawns.

Friends, in life only one can be won by love. It is said that even God bow down in front of love, so everyone should speak the words of love.

Om shanti

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