Inspirational Stories - सत्संग (Satsang)



Inspirational Stories : सत्संग

एक आदमी नें जब एक बार सत्संग में यह सुना कि जिसने जैसे कर्म किये हैं उसे अपने कर्मो अनुसार वैसे ही फल भी भोगने पड़ेंगे यह सुनकर उसे बहुत आश्चर्य हुआ अपनी आशंका का समाधान करने हेतु उसने सतसंग करने वाले संत जी से पूछा अगर कर्मों का फल भोगना ही पड़ेंगा तो फिर सत्संग में आने का किया फायदा है.....?

संत जी नें मुसकुरा कर उसे देखा और एक ईंट की तरफ इशारा कर के कहा की तुम इस ईंट को छत पर ले जा कर मेरे सर पर फेंक दो यह सुनकर वह आदमी बोला संत जी इससे तो आपको चोट लगेगी दर्द होगा मैं यह नहीं कर सकता संत ने कहा अच्छा, फिर उसे उसी ईंट के भार के बराबर का रुई का गट्ठा बांध कर दिया और कहा अब इसे ले जाकर मेरे सिर पे फैंकने से भी कया मुझे चोट लगेगी?

वह बोला नहीं, संत ने कहा, बेटा इसी तरह सत्संग में आने से इन्सान को अपने कर्मो का बोझ हल्का लगने लगता है और वह हर दुःख तकलीफ को परमात्मा की दया समझ कर बड़े प्यार से सह लेता है सत्संग में आने से इन्सान का मन निरमल होता है और वह मोह माया के चक्कर में होने वाले पापों से भी बचा रहता है और अपने सतगुरु की मौज में रहता हुआ एक दिन अपने निज घर सतलोक पहुँच जाता है।

Inspirational Stories - सत्संग (Satsang)

Inspirational Stories : Satsang


When a man once heard in satsang that he who has to perform the same deeds will have to bear the same fruits according to his deeds, he was very surprised to hear that he asked the saintly saints to solve their fears if the fruits of the deeds If you have to suffer then you have the benefit of coming in satsang… ..?

Sant Ji smiled and looked at him and pointed to a brick and said that you take this brick on the roof and throw it on my head, the man said that after hearing this, Sant ji will hurt you, I will not hurt you. The saint said, well, then he tied a bundle of cotton equal to the weight of the same brick and said, now, carrying it and throwing it on my head, will I also get hurt?

He did not say, the saint said, Son, by coming to the satsang like this, the person starts to feel the burden of his deeds light and he takes the pain of every sorrow, considering the mercy of God, with great love, the mind of the human being in the satsang is clean. Happens and he is also spared from the sins caused by the attachment of the illusion of Maya and reaches his own home Satlok one day while staying in the pleasure of his Satguru.

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