Motivational Stories in Hindi - अनुकूल समय (Favorable Time) - Best Positive Short Story in Hindi For Whats App

Motivational Stories - अनुकूल समय



एक बार एक monk (मोन्क )रहता है। वह ऊंची पहाड़ी पर अपने शिष्यों के साथ रहता है।

काफी समय से वह मोन्क अपने शिष्यों के साथ ऊंची पहाड़ी पर रह रहा था। शिष्य उस  मोन्क से शिक्षा ग्रहण कर रहे थे
एक बार उस पहाड़ी पर एक घायल शेर आ पहुंचा ।

घायल शेर को देखकर सारे शिष्य इधर-उधर छुप गए।

वह घायल शेर मोन्क के कमरे में पहुंचा उस मोन्क को उस घायल शेर पर दया आ गई।

मोन्क ने अपने शिष्य को बुलाया और कहा कि इसकी मरम पट्टी करो सभी शिष्य डरते डरते आए और कहने लगे आप गलत कर रहे हैं ।शेर का तो काम इंसान को खाना है आप इसकी मरम पट्टी करेंगे लेकिन यह ठीक होने पर आपको धोखा दे देगा । मोन्क  ने अपने शिष्यों की बात नहीं सुनी और घायल शेर की मरहम पट्टी की।  वह घायल शेर  कृतज्ञता पूर्वक उस   मोन्क के चरणों में धन्यवाद करने बैठ गया ।अब वह शेर वही रूक गया।  उसकी इच्छा उस जगह को छोड़कर जाने की नहीं थी।  मोन्क ने अपने शिष्यों से कहा कि शेर को अब यही रहने दो। शिष्य जो है वह घबरा गए क्योंकि उन्हें डर था कि शेर जो है वह उन्हें कभी भी मार कर खा जाएगा। कुछ दिन बाद   मोन्क ने कहा कि अपना जो गधा है उसके साथ शेर को भेज दिया करो । शेर उस गधे की देखरेख करेगा । अब जब भी गधा घास चरने जाता उसके साथ उसकी रक्षा के लिए शेर जाता । 6 महीने तक एसा चला ।6 महीने बाद एक दिन शेर अचानक खाली वापस आ गया उसके साथ गधा वापस नहीं आया । शिष्य जो है वह अलग अलग तरह की बातें करने लगे ।सबने यही सोचा कि 6 महीने तक इसने दिखावा किया और अंत में गधे को मारकर खाकर आ गया ।* लेकिन शेर चुप था और वह उस   मोन्क के चरणों में जाकर बैठ गया। शिष्यों ने उस शेर पर इल्जाम लगाया कि यह अकेला वापस आया है यह गधे को खाकर आ गया ।  मोन्क  ने अपने शिष्यों से कुछ नहीं कहा ना उस शेर से कुछ कहा ।

 शेर गुमसुम उदास चुपचाप 1 महीना 2 महीना 3 महीना बैठा रहा और सभी शिष्य उसे देखकर तरह तरह की बातें करते ।शेर को कोई भी पसंद नहीं करता था सब उस पर इल्जाम लगाते कि यह गधे को मारकर खा गया है ।शेर ने धोखा दिया है लेकिन शेर क्या करता?  शेर चुप बैठा रहा ।

एक दिन एक कारवां निकला । शेर ने पहाड़ी पर से उस कारवां को गुजरते देखा। कारवां चोरों का था।  शेर को कुछ अजीब सा दिखाई दिया। शेर उस कारवां की तरफ दौड़ा ।शेर को देखकर कारवां के चोर पहाड़ी प्रमुख के पास भाग कर आए और   मोन्क के आगे गिड़गिड़ाना लगे कि हमें शेर से बचाइए। शेर अपने पुराने साथी गधे के साथ लौट के आया ।

चोरों ने यह बात मानी कि उस दिन शेर सो रहा था और धीरे से वे गधे को चुरा कर ले गए थे ।सभी शिष्यों को अपनी गलती का एहसास हुआ । चोरों ने   मोन्क से कहा हम से जितने पैसे लेने हैं ले लीजिए लेकिन हमें इस शेर से बचाइए ।

शेर गलत नहीं था लेकिन उसका समय अनुकूल नहीं था।  उसे गलत समझा जाता रहा पर जब समय आया तो शेर ने अपना पक्ष सामने रख दिया कि उसकी कोई गलती नहीं थी। शेर पर झूठा इल्जाम लगाकर उससे दूरी बनाए रखी उसकी बुराई करते रहे ।

ठीक इसी  शेर की तरह कभी कभी हम गलत नहीं होते पर समय अनुकूल नहीं होता तो हमें गलत समझा जाता है ! पर जब जब समय जवाब देता है.. गवाहो की जरूरत नहीं होती है..। जैसे शेर को किसी गवाह की जरूरत नहीं पडी।

Inspirational Stories - अनुकूल समय (Favorable time)


Inspirational Stories - Favorable time

Once a monk remains. He lives on the high hill with his disciples.

For a long time, Monk was living on the high hill with his disciples. The disciples were studying from that monk
Once an injured lion arrived on that hill.

Seeing the injured lion, all the disciples hid here and there.

When he arrives at the injured lion Monk's room, Monk takes pity on the injured lion.

Monk called his disciple and told him to put an end to it, all the disciples came in fear and started saying that you are doing wrong. Monk did not listen to his disciples and bandaged the wounded lion. The injured lion gratefully sat down at the feet of that monk to thank him. Now the lion stopped there. He did not wish to leave that place. Monk told his disciples that let the lion be the same now. The disciples are nervous because they were afraid that the lion will kill them and eat them. A few days later Monk said send the lion with your donkey. The lion will take care of that donkey. Now whenever the donkey used to graze the grass, the lion would go with him to protect him. It lasted for 6 months. 6 months later, one day the lion suddenly came back empty, the donkey did not return with him. What the disciple is, he started talking different things. He thought that for 6 months he pretended and finally came and ate the donkey. * But the lion was silent and he sat at the feet of that monk. The disciples accused the lion that he had come back alone and ate the donkey. Monk did not say anything to his disciples nor said anything to that lion.

 The lion was sitting silently sad for 1 month, 2 months, 3 months, and all the disciples looked at him and talked in various ways. No one liked the Sher, all accused him that it was eaten by killing the donkey. But what would the lion do? The lion remained silent.

One day a caravan came out. The lion saw the caravan passing through the hill. The caravan was of thieves. The lion saw something strange. The lion ran towards the caravan. Seeing the sher, the thieves of the caravan ran to the hill chief and begged in front of Monk to save us from the lion. The lion returned with his old fellow donkey.

The thieves believed that the lion was sleeping that day and they slowly stole the donkey. All the disciples realized their mistake. The thieves told Monk to take as much money as we want from him, but save us from this lion.

The lion was not mistaken but his timing was not favorable. He continued to be misunderstood but when the time came, the lion put his side to the fore that it was not his fault. By keeping false accusations on the lion and keeping a distance from him, he kept doing evil.

Just like this lion, sometimes we are not wrong, but time is not favorable, then we are misunderstood! But whenever time answers .. Witnesses are not needed ... Like the lion did not need any witnesses.

Om Shanti

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