Inspirational Hindi Story Kahani - कन्हैया के आभूषण (Kanhaiya's Jewellery) - Audible Spiritual Short Story in Hindi

Inspirational Stories - कन्हैया के आभूषण 

एक भागवत कथा वाचक🗣 ब्राह्मण एक गांव में कथा वांच रहे थे. उस दिन उन्होंने नंदलाल, कन्हैया के 😍सौंदर्य, उनके आभूषणों 🎖का बड़ा मन मोहक वर्णन किया. 
.
उधर से गुजरता एक चोर भी कथा सुनने👂 बैठ गया था. उसने जब आभूषणों के बारे में सुना👂 तो उसे लालच 😜आया. 
.
उस दिन की कथा समाप्त होने पर पंडितजी को खूब दक्षिणा 💰मिली जिसे गठरी बनाकर वह लिए चले. जरा सुनसान में पहुंचे तो चोर सामने आ गया👥.
.
उसने पूछा कि ये श्याम मनोहर,कृष्ण कहां रहते हैं. मुझे उनके घर से गहने 💍🏅चुराने हैं. पता बताओ. 📝
.
पंडितजी डर गए. उन्हें अपने सामान 💰का भय हुआ. सो उन्होंने बुद्धि 🤔लगाई और कहा कि उनका पता मेरे झोले में लिखा है. यहां अंधेरा है थोड़ा उजाले में चलो तो देखके बताऊंगा
.
चोर तैयार हो गया. उसे जल्दी थी. पंडितजी ने और चतुराई की. अपना बोझा💰 उसके सिर पर लाद दिया और ऐसे स्थान पर पहुंचकर रूके जहां लोगों को आवाजाही🏃 ज्यादा थी.
.
फिर उन्होंने थैले💰 में से पोथी 📔खोली, देखने 👀का स्वांग करते रहे. विचारकर🤔 बोले वृंदावन चले🚶🏿 जाओ. मुझे जब☝ कृष्ण जी मिले थे तो उन्होंने वृंदावन ही बताया था.👈 
.
👤चोर संतुष्ट हो गया और पंडितजी से आशीर्वाद🙏 लेकर विदा हुआ. चोर रास्ता पूछता, भटकता 🏃वृंदावन चल पड़ा.
.
रास्ते में उसने बड़ी तकलीफें सहीं. जहां-जहां भी कन्हैया के🕌 मंदिर थे, उसमें दर्शन को गया. दर्शन क्या वह तो उनके 💍आभूषणों को देखने👁 जाता कि आखिर ऐसे आभूषण 🏅होंगे कन्हैया के पास.
.
आभूषण निहारने में उसने इतने मंदिरों🕌 में भगवान की इतनी छवि देख ली कि उसे खुली👀 आंखों से भी प्रभु ☝नजर आते. रात को मंदिरों में ठहर👤 जाता और वहीं कुछ प्रसाद🤑 खा लेता.
.
माखन चोर भगवान आभूषण चोर पर रीझ 😍गए. चोर के मन में प्रभु के आभूषणों 💍🏅के प्रति कामना ही भा गई.💗 
.
गोपाल उसे जगह-जगह दर्शन👁 देते तरह-तरह के आभूषण से सजे बालकों 👵🏼के रूप में लेकिन वह उन्हें नहीं लेता. उसे तो असली गोपाल के आभूषण🎖 चाहिए थे.
.
चोर परेशान😇 कि कब वह कन्हैया के धाम पहुंचे और कन्हैया परेशान 😣कि वह इतनी दूर क्यों जा रहा है जब मैं राह में ही उसे सारे आभूषण 🏅दे रहा हूं.
.
भगवान को भक्त से प्रेम 💕हुआ तो भक्त के मन में बसा चोरी का भाव अनुराग 💚में बदल गया.
.
चोर गोकुल पहुंच 🚶🏿गया. एक स्थान पर नदी किनारे भगवान ने उसे गाय चराते उसी रूप में दर्शन दिया जो उसने मंदिरों में देखी थी.
.
जितनी छवि देखी थी सारी एक-एक करके दिखा दी. आभूषणों के साथ. चोर उनके पैरों 👣में गिर पड़ा. 
.
प्रभु ने आभूषण उतारकर दिए और बोले- लो तुम इसके लिए व्यर्थ ही इतनी दूर चले आए. मैं तो कब से तुम्हें दे रहा था. 
.
चोर बोला- आपको देख👀 लिया तो आभूषणों की चमक फीकी पड़ गई. अब तो👉 आपको चुराउंगा.
.
भगवान हंसे- 😃मुझे चुराओगे, कहां लेकर जाओगे ?
.
चोर बोला- वह तो नहीं पता सोचकर🤔 बताता हूं लेकिन आभूषण💍नहीं चाहिए. अब तो मुझे आपकी ही लालसा है. चोर सोचता रहा, प्रभु 😄हंसते रहे. चोर ने बुद्धि दौड़ा 😇ली लेकिन कोई स्थान ही न सूझा.
.
उसे चिंता थी कि इतनी मेहनत से वह इन्हें चुरा ले जाए और फिर सुरक्षा⚔ न कर पाए तो कोई और चुरा लेगा. 
.
सोचते-सोचते उसे नींद😴 आने लगी. उसको उपाय सूझा – जब तक मैं निर्णय नहीं कर लेता कि आपको कहां रखूंगा, आप मुझे रोज दर्शन 😳देते रहो जिससे मुझे भरोसा रहे कि मेरी चोरी का सामान सुरक्षित है. 
.
प्रभु खूब हंसे.😃 उन्होंने कहा- ठीक है ऐसा हो होगा लेकिन तुम्हें कुछ आभूषण🏅 तो लेना होगा.
.
मना🖐 कर दिया. प्रभु रोज शाम उसे दर्शन👀 देते. वह अपने गांव लौट आया. 
.
पंडितजी कथा वांच रहे थे. उन्हें सारी बात बताई. यकीन न हुआ तो शाम🌙 को जब प्रभु👤 दर्शन देने आए तो उनका एक आभूषण 🎖💍मांगकर दिखाया और साबित कर दिया.
.
पंडितजी बोले- भाई चोर असली साधू तो तू है. मैं तो कान्हा का नाम लेकर बस कथाएं सुनाता रहा और आजीविका जुटाता रहा लेकिन तुमने तो उन्हें ही जीत  लिया।



Inspirational Stories - Kanhaiya's Jewellery

A Bhagwat Katha reader recited a story in a village. On that day, he described Nandlal, Kanhaiya's beauty, his jewelery's big heart.
.
A thief who passed through there also sat listening to the story. When he heard about the jewelery, he got lured.
.
At the end of the story of that day, Panditji got a lot of Dakshina Amili whom he made with a bundle and went away. Just when you arrived in the desert, the thief came in front.
.
He asked where does this Shyam Manohar, Krishna live. I want to buy jewelry from his house. Tell the address 4
.
Panditji got scared. They were afraid of their belongings. So he got wisdom and said that his address is written in my bag. It is dark here and if I walk in the light, I will tell
.
The thief is ready He was in a hurry. Panditji did more cleverness. Put his burden on his head and stopped at a place where people had more movement.
.
Then he opened the pothole from the bag, pretending to see it. After thinking, go to Vrindavan. When I met Krishna Ji, he had told Vrindavan only.
.
Chor became satisfied and left with blessings from Panditji. The thief asks the way, wanders away.
.
On the way he corrected a lot of problems. Wherever there were temples of Kanhaiya, darshan went in it. Did he go to see his jewels that Kanhaiya would have such jewelery?
.
In looking at the jewelery, he saw such an image of God in so many temples that he would come to God with open eyes. At night he would stay in the temples and eat some prasadam there.
.
Makhan Chor God was seen as jewelery thief. The thief wished for the Lord's jewelery.
.
Gopal appeared to him from place to place in the form of children adorned with various ornaments but he does not take them. He wanted real Gopal's jewelery.
.
The thief bothers when he reaches Kanhaiya's dham and Kanhaiya is upset that why is he going so far when I am giving him all the jewelery on the way.
.
If God loved the devotee, then the feeling of theft settled in the mind of the devotee changed into Anurag.
.
The thief reached Gokul. At one place, God appeared on the banks of the river in the form of grazing a cow, which he saw in temples.
.
All the images I saw were shown one by one. With ornaments. The thief fell into his feet.
.
Prabhu took off the jewelery and said - Lo, you came so far for this in vain. Since when have I been giving it to you?
.
The thief said - If you see me, then the shine of the jewelery faded. Now you will steal me.
.
Lord Laugh- You will steal me, where will you take me?
.
The thief said - I do not know and tell him thinking, but do not want jewelery. I only crave you now The thief kept thinking, God kept laughing. The thief ran his mind but could not think of any place.
.
He was worried that with such hard work he would steal them and if he could not protect then someone else would steal.
.
He started sleeping while thinking. Think of him as a solution - until I decide where to keep you, you should visit me every day, so that I believe that my stolen goods are safe.
.
Prabhu laughed a lot. He said - well it will happen but you will have to take some jewelery.
.
Refused God would see him every evening. He returned to his village.
.
Panditji was narrating the story. Told them the whole thing. If not convinced, when the Lord came to see him in the evening, he showed a jewelery by asking for it and proved it.
.
Panditji said - Brother Thief, you are the real sadhu. I continued to narrate stories by taking Kanha's name and earning livelihood but you have won them.

Comments