समय और भाग्य (Time & Luck) - Inspirational Stories, Hindi Kahaniya, Stories About Life Shradha 2020



चमनलाल सारा दिन धूप में इधर-उधर घूम-फिर कर टूटा-फूटा सामान और कबाड़ जमा करता, फिर शाम को उसे बड़े कबाड़ी की दुकान पर बेचकर पेट भरने लायक कमा लेता था।

✬ एक दिन वह एक घर से पुराना सामान खरीद रहा था। घर के मालिक ने उसे एक पुराना पानदान भी दिया, जो उसने मोल-भाव करके एक रुपये में खरीद लिया।

✬ कुछ आगे बढ़ने पर एक और घर ने उसे कुछ कबाड़ बेचा, लेकिन घर के मालिक को वह पानदान पसंद आ गया और उसने पांच रुपये में उसे खरीद लिया। लेकिन जब काफी कोशिश के बाद भी वह पानदान उससे नहीं खुला तो अगले दिन उसने उसे चमनलाल को वापस करके अपने पांच रुपये ले लिए।

✬ शाम को बड़े कबाड़ी ने भी वह पानदान न खुलने के कारण उससे नहीं खरीदा। अगले दिन रविवार था। रविवार को बाजार के चौक पर चमनलाल पुराना सामान बेचता था।

✬ वहां उससे कोई ग्राहक पांच रुपये देकर वह पानदान ले गया। लेकिन अगले रविवार को वह ग्राहक वह पानदान उसे वापिस कर गया क्योंकि वह उससे भी नहीं खुला।

✬ बार-बार पानदान उसी के पास पहुंच जाने के कारण चमनलाल को बहुत गुस्सा आया और उसने उसे जोर से जमीन पर पटककर मारा। अबकी पानदान खुल गया। पानदान के खुलते ही चमनलाल की आंखें खुली-की-खुली रह गईं।

✬ उसमें से कई छोटे-छोटे बहुमूल्य हीरे छिटककर जमीन पर बिखर गए थे। अगले दिन प्रातः वह उसी घर में गया जहां से उसने पानदान खरीदा था। पता चला कि वे लोग मकान बेचकर किसी दूसरे शहर में चले गये हैं। 

✬ चमनलाल ने उनका पता लगाने की कोशिश भी की लेकिन नाकामयाब रहा। बाद में चमनलाल उन हीरों को बेचकर संपन्न व्यापारी बन गया और सेठ चमनलाल कहलाने लगा।

✬ समय से पहले भाग्य से ज्यादा किसी को नहीं मिलता। यही चमनलाल के साथ हुआ। वह तो किसी तरह उस पानदान से छुटकारा पाना चाह रहा था, जो बार-बार लौटकर उसी के पास आ जाता था। 

✬ किस्मत बार-बार उसके दरवाजे पर दस्तक दे रही था, तभी तो वह पानदान उसे कबाड़ी से सेठ बना गया।




Chamanlal used to roam around in the sun all day and collect the broken goods and junk, then in the evening he would earn enough to fill his stomach by selling it at the big junk shop.

One day he was buying old stuff from a house. The owner of the house also gave him an old pandan, which he negotiated and bought for one rupee.

After some progress, another house sold him some junk, but the owner of the house liked the pandan and bought it for five rupees. But even after much effort, he did not open the padaan from her, the next day he returned it to Chamanlal and took his five rupees.

Even in the evening, the big kabdi did not buy it from him because of not opening the pandan. The next day was Sunday. On Sunday, Chamanlal used to sell old items at the market square.

From there, he took a customer for five rupees by paying him five rupees. But the next Sunday, the customer returned the pandan to him because he did not even open it.

Charanlal got very angry due to Pandan repeatedly approaching him and he slammed him to the ground. This time the panadan opened. Chamanlal's eyes were wide open as soon as Panadan opened.

Many small precious diamonds were scattered and scattered on the ground. The next morning he went to the same house from where he had bought pandan. It was found that they had gone to another city after selling houses.

Chamanlal also tried to locate them but failed. Later Chamanlal became a rich merchant by selling those diamonds and started to be called Seth Chamanlal.

No one gets more than luck before time. The same happened with Chamanlal. He wanted to somehow get rid of the pandan, who used to come back to him again and again.

Luck was repeatedly knocking at her door, then that pandan made her a Seth from the trash.

Comments

  1. very nice

    from
    ayushi chowdary

    my website - swapnabhoomi.com

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